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वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों से कपास किसान की वैश्विक मांग बढ़ेगी

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                       BL NEWS
             लखनऊ. भारत और विश्व की कपास पैदावार के औसत में अभी भी एक बड़ा अंतर मौजूद है। इसका मतलब है- भूमि का अधिक उपयोग करने के बावजूद किसानों की आमदनी कम होना। आज उस तरीके से 10% से भी कम कपास उगाया जाता है जो सक्रिय रूप से किसान के आर्थिक विकास और पर्यावरण को सुरक्षा दे सके। नवीनतम ट्रेंड से पता चलता है कि कोविड-19 के प्रकोप के बाद से कपड़ा उद्योग अपनी कपड़ा आपूर्ति श्रृंखला को आगे बढ़ाने के लिए टिकाऊ फाइबर चुनने के मामले में बड़ा संवेदनशील हो गया है।
यूनाइटेड स्टेट्स डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर की रिपोर्ट के मुताबिक 2020/21 में कपास की वैश्विक खेती पिछले वर्ष हुई 114.1 मिलियन गांठों की तुलना में 6.5 प्रतिशत घट गई है।
भारत में कपास की खेती की टिकाऊ पद्धतियों के बारे में बात करते हुए नेटाफिम इंडिया के एजीएम (एग्रोनॉमी एंड मार्केटिंग) सी के पटेल ने कहा कि “मौजूदा परिदृश्य को बदलने के लिए यह अनिवार्य हो गया है कि किसानों को कपास-कृषि की गुणकारी पद्धतियों एवं वैज्ञानिक खेती की तकनीकों को अपनाने के बारे में जागरूक किया जाए।

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