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अब्दुल गफूर ने बतौर मुख्यमन्त्री बिहार पर अपनी छाप छोड़ी: तारिक़ अनवर

हर ज़िले में 25 अल्पसंख्यक अधिवक्ताओं को गफूर एक्सिलेंसी सम्मान दिया गया

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                     BL NEWS
             लखनऊ. बिहार के पूर्व मुख्यमन्त्री अब्दुल गफूर बेदाग छवि के नेता थे. कांग्रेस की समाजवादी और सेकुलर विचारधारा के अपने समय के उत्कृष्ट प्रतिनिधि थे. अपने दो साल के कार्यकाल में अपने नेतृत्व की छाप छोड़ी और बिहार के विकास की बुनियाद रखी.
उक्त वक्तव्य पूर्व केंद्रीय मन्त्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता तारिक़ अनवर ने उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक कांग्रेस द्वारा बिहार के पूर्व मुख्यमन्त्री स्व.अब्दुल गफूर की 17 वीं पुण्यतिथि पर आयोजित वेबिनार में दिया. आज हर ज़िले में अल्पसंख्यक समाज के 25 अधिवक्ताओं को अल्पसंख्यक कांग्रेस द्वारा गफूर एक्सिलेंसी सम्मान भी दिया गया.
मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार अनिल चमड़िया ने कहा कि अब्दुल गफूर साहब सुभाष चंद्र बोस के सबसे क़रीबी सहयोगियों में रहे.
उन्होंने कहा कि 1973 में इंदिरा गांधी ने उन्हें तब मुख्यमन्त्री बनाया जब बिहार के अंदर फासीवादी और सांप्रदायिक ताक़तों का उभार था.
संचालन अल्पसंख्यक कांग्रेस के प्रदेश चेयरमैन शाहनवाज़ आलम ने किया. उन्होंने बताया कि आज हर ज़िले में अल्पसंख्यक समुदाय के 25 अधिवक्ताओं को गफूर एक्सिलेंसी सम्मान से सम्मानित किया गया.
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव और उत्तर प्रदेश के प्रभारी तौकीर आलम ने पूर्व मुख्यमन्त्री को एक कुशल प्रशासक और दूरदृष्टा नेता बताया.
वेबिनार में अल्पसंख्यक कांग्रेस के प्रदेश वाइस चेयरमैन मोहम्मद अहमद, डॉ श्रेया चौधरी, महासचिव मुनीर अकबर, हुमायूँ बेग, शाहनवाज़ खान, मोहम्मद उमैर, दिल्ली अल्पसंख्यक कांग्रेस के प्रवक्ता अखलाक अहमद, सबिहा अंसारी, शाहिद तौसीफ, इक़बाल क़ुरैशी आदि मौजूद रहे.

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