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‘गंगा के बिना पूरे नहीं होते लोक जीवन के संस्कार’

लोक संस्कृति शोध संस्थान का आनलाइन आयोजन

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               लखनऊ। गंगा दशहरा के अवसर पर गंगोत्री से गंगा सागर तक की शब्द यात्रा निकाली गयी। रविवार को लोक संस्कृति शोध संस्थान एवं त्रिवेणी अंतरराष्ट्रीय संस्था के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित आनलाइन गंगा यात्रा संगोष्ठी में देश-विदेश के सैकड़ों लोग सहभागी हुए। संगीत विदुषी प्रो. कमला श्रीवास्तव के आर्ष वचन एवं वरिष्ठ साहित्यकार डा. विद्या विन्दु सिंह के बीज वक्तव्य से शुरु हुई संगोष्ठी में भोपाल की ऋतुप्रिया खरे ने गंगा के स्वर्ग से अवतरण, उनके धरती पर विचरण करने और उनके महात्म्य पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए इसके प्रवाह को निर्मल बनाये रखने की अपील की।
कार्यक्रम का शुभारम्भ प्रो. कमला श्रीवास्तव ने गंगा से जुड़े संस्मरण के साथ लोक गीत गंगा तोरी लहर सभै कै मन भाई से की। डा. विद्याविन्दु सिंह ने गंगा के प्रकट होने से सम्बन्धित विभिन्न पौराणिक व लोक कथाओं की चर्चा करते हुए कहा कि भागीरथी गंगा की महिमा का बखान प्राचीन साहित्य से लेकर आज तो विभिन्न रूपों में हुआ ही है पर जन मानस में गंगा मइया के प्रति जो अकूत श्रद्धा भरी है उसको वाणी देना कठिन है। उन्होंने कहा कि लोक जीवन के समस्त संस्कार गंगा के स्मरण और उनके पवित्र जल की उपस्थिति के बिना सम्पन्न नहीं होते। गंगा जल के प्रति निष्ठा का ही परिणाम है कि कहीं का भी जल हो उसे हाथ में लेकर गंगाजल की ही शपथ ली जाती है। गंगा देहु भगीरथ पूत… कहकर उनसे भागीरथ जैसे पुत्र की कामना की जाती है। वे पुत्रदात्री तो हैं ही जीवन की निरन्तरता, प्रेम की सनातनता की अधिष्ठात्री देवी हैं। डा. विद्याविन्दु सिंह ने गंगा दशहरा पर सुनी जाने वाली कथा व उनसे जुड़ी अन्य लोक कथाओं भी सुनायीं।
साहित्यकार ऋतुप्रिया खरे ने अपनी पुस्तक ‘विकास की गंगा’ से गंगा महात्म्य का वर्णन करते हुए सोदाहरण गीत भी प्रस्तुत किये। उन्होंने गंगा के प्रवाह को निर्मल बनाये रखने के संकल्प की याद दिलाते हुए युगों युगों से बहती गंगा की सौगन्ध उठायेंगे, गंगा फिर निर्मल होगी हम गंगा स्वच्छ बनायेंगे… सुनाया। उल्लेखनीय है कि विकास की गंगा पुस्तक का लोकार्पण गत दिनों केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने किया था। लोक संस्कृति शोध संस्थान की सचिव सुधा द्विवेदी ने बताया कि फेसबुक लाइव द्वारा देश-विदेश से सैकड़ों लोग आयोजन से जुड़े और इसे शेयर भी किया। तबलावादक पवन तिवारी के तकनीकी सहयोग से हुए कार्यक्रम का संचालन एस.के.गोपाल ने किया।

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