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डाक्टर लिखने के अधिकारी नहीं एमबीबीएस 

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                   वीरेन्द्र मिश्र

आयुर्वेद सनातन चिकित्सा पद्धति है,धरती पर आयुर्वेद तब से है जब धरती पर न डब्लूएचओ था न आईएमए न ईसा न मूसा और न नासा। मैं रामराज स्थापना महामंच का राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित करने के आन्दोलन का संयोजक वीरेन्द्र मिश्र आयुर्वेद के समर्थन में पूरी तरह रामदेव के साथ हूं।

डाक्टर लिखने के अधिकारी नहीं एमबीबीएस, डाक्टर केवल पीएचडी व डाक्टरेट की डिग्री लेने वाला ही लिख सकता है। डाक्टर लिखने का अधिकार कोई एनजीओ किसी को नहीं दे सकता। चिकित्सा सेवा मानवीय कार्य है,इसे प्रोत्साहन देना चाहिए परन्तु यह व्यवसाय न बने । कई दिनों से रामदेव बनाम आईएमए ,आयुर्वेद बनाम एलोपैथ विवाद चल रहा है।चले भी क्यों न क्योंकि रामदेव योगगुरु से व्यापारी बन गये है, 18000 करोड़ का टर्नओवर है।
आयुर्वेद सनातन चिकित्सा है , आयुर्वेद धरती पर तबसे है जब धरती पर न डब्लूएचओ था,न आईएमए,न ईसा न मूसा न ही नासा सिर्फ सनातन धर्म था। आज एलोपैथ लूट का व्यवसाय बन गया है। 15 रुपए कु दवा 120में बिकती हैं। आपरेशन के नाम पर देशभर में लूट हो रही है। 22 मई को हैदराबाद के अपोलो हास्पिटल ने ख्वाजा हसनुद्दीन के कोरोना इलाज का बिल 22लाख 90 हजार का बनाया। एलोपैथिक दवाओं में एमआरपी तो लिखी होती है परन्तु उत्पादन की लागत नहीं लिखते।कैसै तय होती है एमआरपी,15 रुपए की दवा की एमआरपी 120 रुपए लिखने की परमीशन कोन देता है।
महाराज बिन्दुसार का जन्म पहले सिजेरियन प्रसव से हुआ था ,तब न एलोपैथ था न होम्योपैथ ।
मैं रामराज स्थापना महामंच का राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा भारत हिन्दू राष्ट्र आन्दोलन का संयोजक वीरेन्द्र मिश्र सनातनी आयुर्वेद के सम्बन्ध में पूरी तरह रामदेव के साथ हूं।
चिकित्सा मानवीय सेवा कार्य है।1928 में गठित आईएमए ईसाइयों का एनजीओ है जिसे इटली निवासी सोनिया गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस तथा बामपंथी हवा दे रहे हैं।

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