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खादी का कुर्ता पजामा व बिखरे घुंघराले बाल जार्ज को क्रांतिकारी राजनेता बताते थे :के. के. त्रिपाठी

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खाटी समाजवादी की खट्टी मीठी यादें

लखनऊ लुटियन दिल्ली का 3 कृष्ण मैनन मार्ग पर वह अकेला बंगला जिस के गेट पर कोई सुरक्षाकर्मी नहीं रहता था जो आम और खास के लिए बराबर खुला रहता था यह बंगला देश के तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस का था यही नहीं घर के अंदर कोई सरकारी सेवक नहीं था केवल दो निजी सहायक थे जो आगंतुकों को चाय पानी कराया करते थे कई बार लोग उनके घर के सामने के दरवाजे से घुसते और सभी कमरों में उन्हें तलाशते हुए पिछले दरवाजे से बिना रोक-टोक बाहर निकल आते
ऐसा नहीं था कि बंगला सुनसान रहता जॉर्ज
फर्नांडीस इतना लोकप्रिय थे कि देश-विदेश से लोग आकर बरामदे में बैठ जाने पर आम और खास में कोई फर्क नहीं था रसोई में गैस पर हमेशा चाय बनती रहती थी वह एक्टिविटीज पहले नेता बाद में थे यही वजह थी कि बतौर केंद्रीय मंत्री मिला सरकारी बंगला म्यमार विद्रोहियों का दिल्ली में स्थाई पता बना भारत सरकार एक ओर म्यमार सरकार से राजनयिक रिश्ते सुधार रही थी वही जॉर्ज फर्नाडीज विद्रोहियों के सहायता दे रहे थे उनकी खुद की पहचान विद्रोही नेता के तौर पर थी इसके बावजूद तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई उन पर पूरा भरोसा करते थे वे अटल बिहारी सरकार के संकटमोचक थे अटल बिहारी बाजपेई देश व राष्ट्रीय मामले पर जांच फर्नाडीज से जरूर सलाह मशविरा करते थे 1999 में 22 सहयोगी दलों को मिलाकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन एनडीए बनाया तो संयोजक की जिम्मेदारी जॉर्ज को ही दी
देश के मजदूर आंदोलन को आगे बढ़ाने का काम जॉर्ज फर्नाडीज ने बढ़ चढ़कर किया उन्ही दौरान राम मनोहर लोहिया के संपर्क में आकर सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया वे जीवन भर समाजवादी रहे और समाजवाद को अपने जीवन में उतारने का भरसक प्रयास किया भाजपा के साथ होने के बावजूद उन्होंने समाजवादी विचारधारा से समझौता नहीं किया व प्रखर वक्ता थे 1977 में जितने सशक्त तरीके से उन्होंने जनसंघ वर्तमान में भाजपा का विरोध कर मुरारजी देसाई सरकार को छोड़कर जाने को विवश किया वहीं भाजपा के साथ आने पर उन्होंने उतनी ही ताकत से उसका बचाव भी किया संसद के अंदर भी और बाहर भी बिना प्रेस किया खादी का कुर्ता पजामा और विखरे घुंघराले बाल जार्ज को भारत का पहला क्रांतिकारी राजनेता बनाते थे उनसे पहले वह जमीनी पकड़ वाले मजदूर नेता थे चाहे वह होटल और रेस्टोरेंट मालिकों के खिलाफ आंदोलन हो या ट्रांसपोर्टरों की मनमानी के खिलाफ हड़ताल जॉर्ज की पहचान जबरदस्त मजदूर नेता की थी वह मुंबई के टैक्सी यूनियन के भी नेता थे जब चाहते थे मुंबई में चक्का जाम हो जाता था जाम शब्द का प्रयोग मुंबई की हड़ताल से ही शुरू हुआ जिसका श्रेय मजदूर नेता जार्ज फर्नाडिस को जाता है 1967 से वे दक्षिण मुंबई से लोकसभा चुनाव लड़े और कद्दावर कांग्रेसी नेता एसके पाटिल को हराया जबकि एसके पाटिल ने घोषणा की थी कि मुझे भगवान भी नहीं हरा सकते लेकिन जॉर्ज फर्नाडीज ने उन को हराकर भारतीय राजनीति में इतिहास रचा भारतीय रेल मजदूर संघ के अध्यक्ष रहे थे 1974 में उनके आहवान पर 20 दिन तक चली रेल कर्मियों की हड़ताल ने देशभर में ट्रेनों का चक्का जाम कर दिया था आपातकाल के दौरान उन्हें गिरफ्तार करने की कोशिश नाकाम रही वह पगड़ी बांधकर सिख भेष में घूम घूम कर सरकार के खिलाफ सरकार के खिलाफ हवा देते रहे तत्कालीन प्रधानमंत्री ने एड़ी से चोटी तक जोर लगाकर उन्हें कोलकाता से गिरफ्तार कराया विदेशी मीडिया ने पूरे विश्व में इस घटना को फैलाने का काम किया जिससे जार्ज का जीवन बचा 1977 में जनता पार्टी के टिकट पर बिहार के मुजफ्फरपुर से जीते व केंद्रीय उद्योग मंत्री बने विदेशी मुद्रा विनियम कानून फेरा के उल्लंघन के आरोप में उन्हें आईबीएम और कोकोकोला जैसे नामी-गिरामी कंपनियों को देश छोड़कर जाने का आदेश दिया बतोर रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नाडीज सियाचिन पहुंचने वाले पहले रक्षा मंत्री थे अपने 5 वर्ष के कार्यकाल में उन्होंने 30 बार से ज्यादा सियाचिन की यात्रा की उन्होंने न सिर्फ सैनिकों की समस्याएं समझी बल्कि उन्हें दूर करने का प्रयास किया उनके नेतृत्व में ही सेना कारगिल की लड़ाई जीती जार्ज के ऊपर कुछ आरोप भी लगे लेकिन सभी आरोपों से बरी हुए उन्होंने समता पार्टी का विलय जनता दल यू में करके जीवन की भारी भूल की जिससे उन्हें उन्होंने स्वीकार किया उनकी जीवन की कहानी बड़ी रोचक रही वह सभी के लिए सुलभ रहे उनको गाड़ी बंगला का मोह कभी नहीं रहा कभी-कभी संसद व पैदल जाते थे अपनी फीयट गाड़ी से नहीं वह समाजवाद को अपने आचरण में उतारने का भरसक प्रयास किया देश ऐसे समाजवादी नेता का दे सदैव ऋणी रहेगा.
लेखक- प्रो. के. के. त्रिपाठी महासचिव प्रवक्ता जदयू

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