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सिखों की कुर्बानियों पर देश को गर्व है- वीरेंद्र मिश्रा

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देश ,औरंगजेब के खूनी आतंक से आतंकित कश्मीरी पंडितों के रक्षार्थ तथा मुस्लिम धर्म न स्वीकारने पर क्रूर मुगल शासक औरंगजेब ने गुरु तेगबहादुर का सर धड़ से अलग कर दिया। गुरु तेगबहादुर का शीश जहां कटकर गिरा था वहीं आज ऐतिहासिक शीशगंज गुरुद्वारा है।आजादी के 74 वर्ष बाद भी ऐसे क्रूर हत्यारे के नाम पर अब भी दिल्ली में औरंगजेब लेन का होना दिल्ली के शाशकों की बेहयाई का प्रतीक है।
यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के इतिहास के प्रोफेसर डॉ नोयल किंग ने गुरु तेगबहादुर की कुर्बानी को मानव अधिकारों की रक्षा के लिए दिया गया पहला बलिदान बताया।
वर्ष 1606 में हिन्दुत्व की रक्षा के लिए सिखों के पांचवें गुरु , गुरु अर्जुन देव की हत्या मुगल शासक जहांगीर (जिसे चापलूस दरबारी इतिहासकार बड़ा न्यायप्रिय,उदार तथा प्रजापालक बताकर महिमा मंडित करते थे) के आदेश पर की गयी।
यही नहीं वर्ष 1708 में मुस्लिम धर्म न स्वीकारने पर क्रूर मुगल शासकों ने गुरु तेग बहादुर सिंह के पुत्र दसवें गुरु ,गुरु गोबिंदसिंह के चार पुत्रों को जिंदा दीवार में चुनवा दिया बाद में गुरु गोविंद सिंह की भी हत्या कर दी।
गुरु गोविंद सिंह 14 बार मुगल शासकों से लड़ें। लाहौर के तत्कालीन गवर्नर जकरिया खान बहादुर ने सिखों का सर कलम करने वालों को मोटा इनाम देने का फतवा जारी किया जिसके परिणामस्वरूप ,एक बार मुगलों ने सिखों को चारो तरफ से घेर कर आक्रमण कर दिया जिसमें 7000 सिखों को जान गंवानी पड़ी परन्तु मुगलों की गुलामी नहीं स्वीकारी।
अंग्रेज और मुगल, सिखों के शौर्य से भयभीत रहते थे। ब्रिटिश सरकार ने देशद्रोह में 121भारतीयों को फांसी की सजा सुनाई जिसमें 93सिख थे, इसी प्रकार जिन 2626 भारतीयों को देशद्रोह के आरोप में सजा सुनाई गई थी उनमें भी 2147 सिख ही थे।
वीरेन्द्र मिश्र राष्ट्रीयअध्यक्ष भ्रष्टाचार मुक्ति आन्दोलन/रामराज स्थापना महामंच
मो. नं. 9415158971, 8299456148

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