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पूर्व महापौर डॉ दाऊजी गुप्त का निधन

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राजनेता,बहुभाषाविद्  साहित्य कला व संस्कृति के प्रहरी थे डॉ.दाऊजी गुप्त
BL NEWS
लखनऊ.लखनऊ की अमूल्य धरोहर को कोरोना ने छीन लिया.लखनऊ की शान पूर्व महापौर , पूर्व सदस्य विधान परिषद , मोतीलाल मेमोरियल सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ दाऊजी गुप्त के  निधन से लखनऊवासियों  में शोक की लहर छा गई. । स्वर्गीय गुप्त  पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय चंद्र भानु गुप्त द्वारा स्थापित मोतीलाल मेमोरियल सोसाइटी के अध्यक्ष भी थे । 15 भाषाओं के ज्ञाता थे. सादगी और विद्वता की प्रतिमूर्ति थे. ऐसे महान व्यक्तित्व के धनी डॉक्टर दाऊजी गुप्त के प्रति  प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन, मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, पूर्व मुख्यमंत्री मायावती सहित जानीमानी हस्तियों ने शोक संवेदना व्यक्त की है
.स्व. दाऊजी गुप्त ख्याति लब्ध राजनेता तो थे ही बहुभाषाविद् तथा  साहित्य, कला व संस्कृति के प्रहरी थे। सामाजिक कार्यों में सदैव बढ़ चढ़कर सहभागी होते थे। वे लेखकों की अन्तरराष्ट्रीय संस्था ‘पेन’ की भारतीय इकाई के अध्यक्ष थे। चीन के उईघुर प्रांत के लेखक मोहम्मद यासीन को उनकी एक कहानी पर जेल में डाल दिया गया था। उनकी रिहाई के लिए पेन द्वारा चलाए गए आंदोलन में दाऊजी ने सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने न केवल उस कहानी का हिंदी अनुवाद करने के लिए उइघुर प्रांत की चीनी भाषा सीखी अपितु उस कहानी का कई भाषाओं में अनुवाद भी कराया। दाऊजी के संपादन में अमेरिका से छपने वाली हिंदी की अंतरराष्ट्रीय पत्रिका सौरभ में जंगली कबूतर शीर्षक से यासीन की उक्त कहानी छपी। दाऊजी के कहने पर मेरी धर्मपत्नी सुधा द्विवेदी ने उस कहानी का भोजपुरी अनुवाद भी किया था। उत्तर प्रदेश में सर्वप्रथम गौतम बुद्ध, डॉ. भीमराव अंबेडकर आदि की प्रतिमा लगवाने का श्रेय भी डॉ. दाऊजी के नाम है। लखनऊ के मेयर और उत्तर प्रदेश विधान परिषद सदस्य के रूप में भी उनका योगदान सदैव याद रखा जाएगा। लखनऊ ने आज अपना एक नायाब हीरा खो दिया।
वर्ल्ड मेयर कांफ्रेंस के वाईस प्रेजिडेंट और डायरेक्टर
1971 में वर्ल्ड मेयर कांफ्रेंस हवाई (अमेरिका) में हुई थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए देश भर से तीन मेयर लखनऊ, बंगलोर और मुंबई को चुना था। दाऊजी गुप्ता ने सिर्फ भारत का प्रतिनिधित्व ही नहीं किया बल्कि वे विश्व भर से आए 2000 हज़ार मेयरों की बैठक के वाईस प्रेजिडेंट और डायरेक्टर भी चुने गए।
21 साल तक रहे मेयर
दाऊजी गुप्ता अब तक सबसे लम्बे समय के लिए राजधानी के मेयर रहे हैं। वे 5 जुलाई 1971 से 27 मई 1992, यानी 21 साल तक मेयर रहे। इन्ही के कार्यकाल में मेयर पद की नियुक्ति का समय 1 साल से 5 साल हुआ था। दरअसल 1960 से 1973 तक मेयर सिर्फ एक साल के लिए ही चुने जाते थे।
1971 में आयी बाढ़ से निपटने के लिए लखनऊ नगर निगम ने अहम भूमिका निभाई थी। उस दौरान खुद इंद्रा गांधी बतौर प्रधानमंत्री राहत कार्यों का हाल चाल लेने लखनऊ आयी थी और दाऊजी गुप्ता से जानकारी ली थी।

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