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लड़कियों की बाहर आने-जाने की दर में भी 37 फीसदी का इजाफा

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पीढ़ियों की बीच हिचक घटी, किशोर-किशोरियों के साथ अब हो रही है खुलकर बात

BL NEWS

लखनऊ. किशोर-किशोरियों के साथ हिंसा को लेकर अब समुदाय आवाज उठाने लगा है, महिलाओं के खिलाफ हिंसा को सभी के लिए अस्वीकार बनाने के लिए काम करने वाली स्वंयसेवी संस्था ब्रेकथ्रू के सर्वे में यह सामने आया है कि 21 फीसदी लोगों को किशोर-किशोरियों या किसी भी लिंग के साथ हिंसा अब स्वीकार नहीं है वह अब खुलकर हिंसा के मुद्दे पर बात करने लगे हैं। यह ताजा आकड़ें ब्रेकथ्रू के किशोर-किशोरी सशक्तिकरण कार्यक्रम ‘दे ताली’ के इंडलाइन सर्वे से आए हैं। यह सर्वे आज ब्रेकथ्रू की सीईओ सोहिनी भट्टाचार्य, प्रोग्राम डायरेक्टर, नयना चौधरी और स्टेट लीड (उत्तर प्रदेश) कृति प्रकाश ने प्रेस कांफ्रेंस में मीडिया के साथ साझा किए।लड़कियों की बाहर आने-जाने की दर में भी 37 फीसदी का इजाफा

ब्रेकथ्रू की सीईओ सोहिनी भट्टाचार्य ने कहा कि सर्वे के परिणामों से हम बहुत उत्साहित है,हमें खुशी है कि हम इस कार्यक्रम के माध्यम से किशोर-किशोरियों के जीवन में बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य का वातावरण बना पाए वहीं उनके साथ होने वाली लिंग आधारित भेदभाव व हिंसा जैसे मुद्दे पर एक प्रभावी संवाद शुरू कर पाए। महिलाओं और लड़कियों के साथ होने वाली हिंसा को समाप्त करने अपनी मुहिम को जारी रखते हुए ब्रेकथ्रू किशोर-किशोरियों के साथ अपने कार्यक्रम को अब पंजाब लेकर जा रहा है। वहां पर हम पंजाब सरकार के साथ मिलकर किशोर-किशोरियों के साथ जेंडर के मुद्दे पर काम शुरू कर रहे है।

उत्तर प्रदेश के 6 जिलों लखनऊ, गोरखपुर, सिद्धार्थनगर, महाराजगंज, जौनपुर और गाजीपुर में 11-22 आयुवर्ग के किशोर-किशोरियों के साथ किया गया। इसके आंकड़ों का साझा करते हुए ब्रेकथ्रू की स्टेड लीड (उत्तर प्रदेश ) कृति प्रकाश ने बताया कि 2015 में इन जिलों में हम लोगों ने किशोर-किशोरियों के शिक्षा, स्वास्थ्य, लिंग आधारित भेदभाव जैसे मुद्दों पर काम करना शुरू किया था। जिसके सुखद परिणाम हमारी इंडलाइन सर्वे में देखने को मिले है।

ब्रेकथ्रू की प्रोग्राम डायरेक्टर नयना ने कहा कि किशोर-किशोरियों की शिक्षा का मुद्दा हो उनके साथ लिंग आधारित भेदभाव, हिंसा व स्वास्थ्य आदि का मुद्दा हर जगह हमने देखा कि यह सब उनकी कंडीशनिंग का हिस्सा है.

उन्होंने कहा कि हमने जब काम शुरू किया था तब हमने देखा कि किशोर-किशोरियों की अपने माता-पिता अन्य बड़े-बुजुर्गों से बातचीत बहुत कम होती थी, वह अपनी बातें उनसे नहीं कह पाते थे, ब्रेकथ्रू ने इस कल्चर को बदलने की सोची और उनके बीच के संवाद का एक ब्रिज तैयार किया। जिसका असर ये हुआ कि इंटरजेंडर कम्युनिकेशन में 100 फीसदी से अधिक का इजाफा हुआ। जो बेसलाइन के 33 फीसदी से बढ़कर 69 फीसदी हो गया है।

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