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विपश्यना से मन को शान्त किया जा सकता है’

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पालि भाषा की वेबसाइट का उद्घाटन
लखनऊ.अन्तरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान, लखनऊ द्वारा पर्यटन विभाग, उ.प्र. के सहयोग से अन्तर्राष्ट्रीय बुद्धिस्ट कान्क्लेव जिनका मुख्य विषय ‘शान्ति और सद्भाव पर भगवान बुद्ध का वैश्विक संदेश‘ विषय पर संस्थान के प्रेक्षागृह में आयोजित तीन दिवसीय बुद्धिस्ट कान्क्लेव के समापन सत्र के मुख्य अतिथि मुकेश कुमार मेश्राम, प्रमुख सचिव संस्कृति एवं पर्यटन एवं अध्यक्षता भदन्त शान्ति मित्र, अध्यक्ष, अन्तर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान लखनऊ ने की।
आयोजन समिति के अध्यक्ष राजेश चन्द्रा द्वारा समापन सत्र में आये अतिथियों के सम्मान में स्वागत भाषण दिया गया तथा कान्क्लेव पर प्रकाश डाला गया। समापन सत्र में मुकेश कुमार मेश्राम ने डाॅ. प्रफुल्ल गडपाल द्वारा निर्मित पालि भाषा की वेबसाइट का उद्घाटन किया और पालि भाषा से सम्बन्धित साहित्य को विभिन्न देशों की भाषाओं में अनुवाद करने पर बल दिया। अपने सम्बोधन में उ. प्रदेश सरकार द्वारा प्रमुख बौद्ध स्थसलों के विकास तथा संरक्षण के लिए किये गये प्रयासों पर तथा धम्म यात्रा के आयोजन पर विस्तार से प्रकाश डाला। बताया कि विपश्यना के द्वारा मन को शान्त किया जा सकता है जिससे तृष्णा में कमी आयेगी और विभिन्न प्रकार की बीमारियों से बचा जा सकता है, आपने बौद्ध धर्म के तर्क संगत तथा वैज्ञानिक स्वरूप पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। अपने अध्यक्षीय भाषण में भदन्त शान्ति मित्र ने कहा कि 21वीं शताब्दी का विश्व अभूतपूर्व चुनौतियों का सामना कर रहा है। विश्व में सर्वत्र तनाव का वातावरण व्याप्त है। विश्व में शान्ति एवं सद्भाव स्थापित करने के लिए हमें शान्ति के मार्ग का अनुसरण करने की आवश्यकता पहले से और बढ़ गयी है।
शिव कुमार पाठक, निदेशक अन्तर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान ने तीन दिवसीय बुद्धिस्ट कान्क्लेव की संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया और बताया कि इस त्रिदिवसीय कान्क्लेव में देश एवं विदेश के 20 से अधिक विश्वविद्यालयों से आॅनलाइन और आॅफलाइन 80 शोधपत्र प्रस्तुत हुए हैं। देश में बौद्ध दर्शन, पालि एवं प्राच्य विद्या के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए जाने-माने विश्वविद्यालय यथा जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय, सागर विश्वविद्यालय, नालन्दा विश्वविद्यालय, बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ विश्वविद्यालय, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज, बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय एवं दक्कन कालेज पुणे आदि तथा श्रीलंका, म्यानमार, अमेरिका, थाईलैण्ड, वियतनाम एवं मंगोलिया के विश्वविद्यालयों द्वारा भी इस कान्क्लेव भी सक्रिय रूप से प्रतिभाग करते हुए उच्च कोटि के शोधपत्र प्रस्तुत किये गये हैं और बताया कि इस कान्क्लेव का देश में ही नहीं बल्कि विदेश में भी बौद्ध दर्शन, साहित्य एवं पालि भाषा के विद्वानों के मध्य अत्यन्त उत्साह का प्रसार हुआ है। इस दृष्टिकोण से आयोजन पूर्ण रूप से सफल है और इस सफलता हेतु राजेश चन्द्र, असिस्टेंट प्रो. प्रफुल्ल गडपाल एवं भिक्षु डाॅ. उपनन्द के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करता हूॅ। संस्थान के अध्यक्ष भदन्त शान्ति मित्र विशेष रूप से संस्थान के इतिहास में चीर काल तक स्मरण किये जायेंगे जिनका इस कार्यक्रम को सफल रूप से आयोजन कराने में मार्गदर्शक के रूप आर्शीवाद मिला। संस्थान में कार्यरत डाॅ. धीरेन्द्र सिंह का योगदान अविस्मरणीय रहेगा। संस्थान के सभी कर्मचारियों के द्वारा दिन-रात अथक परिश्रम के लिए मैं हमेशा ऋणी रहूॅगा। अल्प समय में उनके अथक प्रयास से ही यह आयोजन सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। अन्त में भदन्त शान्ति मित्र अन्तर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान के धन्यवाद के साथ बुद्धिस्ट कान्क्लेव का समापन किया गया

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