खबरों का है यही बाजार

बर्बाद हो रही फसलें ,नहीं हो रही बारिश , सरकारी नलकूप भी पडे हैं खराब।

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बलरामपुर( डॉक्टर संजय शुक्ला पथिक)– प्रकृति की गोद कहे जाने वाले बलरामपुर प्रकृति का प्रकोप भी सर चढ़कर बोलता है। शुरुआत में भारी बरसात से पूरे जिले में तबाही मच जाती है और उसके बाद सूखे की वजह से फसलें नष्ट हो जाती हैं। प्राकृतिक आपदाओं व सरकारी उदासीनता की मार झेल रहे अन्य नेताओं के ऊपर अब पानी की किल्लत कहर बरपा रही है। बरसात न होने के कारण खेतों में लगी धान की फसल सूखने लगी है धान के खेतों में दरारें पड़ गई है। अन्नदाता आसमान की तरफ टकटकी लगाए बरसात की आस लिए देख रहे हैं। जिले के अधिकांश गांव की यही हालत है। अभी तक यूरिया की किल्लत झेलने के बाद अन्य दाताओं के समक्ष अब सिंचाई की समस्या उत्पन्न हो गई है यदि दो-चार दिन में बरसात नहीं हुई तो फसलें बर्बाद हो सकती है।
     बताते चलें कि इंडो नेपाल बॉर्डर पर स्थित मणिपुर सहजनवा गन वरिया महादेव बाकी जय रामपुर खादर भटपुरवा पिपरा नवल गंज बरौलिया डेरवा रतनवा भवानी डीह रमवापुर भवन या पुर समेत सैकड़ों गांव में सिंचाई का एकमात्र साधन प्रकृति द्वारा होने वाली बरसात मात्र है। आजादी के 70 सालों के बाद भी कृषि विभाग तथा सिंचाई विभाग ने इन क्षेत्रों में सरकारी नलकूपों के निर्माण की कोई कोशिश नहीं की है जिससे यहां के किसान आज भी पारंपरिक खेती करने को मजबूर हैं और वह भी प्रकृति के ऊपर निर्भर करता है कि अब उन्हें साल भर का खाने का अनाज मिलेगा और कब नहीं | किसानों को सिंचाई की सुविधा देने के लिए बनवाई गई कुछ नाम मात्र की नहरों में पानी की जगह धूल उड़ रही है जबकि पैसों से संपन्न किसान तो निजी नलकूप से अपने खेतों की सिंचाई कर रहे हैं लेकिन गरीब किसान बर्बाद हो रही फसल को बेबसी से देखने पर मजबूर हैं | अभी यूरिया की किल्लत से किसान उबरे भी नहीं थे कि सूखे ने उनकी बच्ची खुशी आशाओं पर भी तो सारा बात कर दिया

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