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बंदी माता मंदिर में नागा सन्यासियों ने मनाया राखी का त्यौहार

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लखनऊ। डालीगंज स्थिति श्री बंदी माता मंदिर में बड़े ही हर्षोउल्लास के साथ मनाया गया राखी का त्यौहार।

श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाता है। इसे आमतौर पर भाई-बहनों का पर्व मानते हैं लेकिन, अलग-अलग स्थानों एवं लोक परम्परा के अनुसार अलग-अलग रूप में रक्षाबंधन का पर्व मानते हैं।

लेकिन आमजनमानस के बीच एक ऐसे समाज ऐसा भी है जो मोहमाया से पूरी तरह विरक्त है। जी हां वो कोई और नहीं बल्कि संत समाज है। श्री बंदी माता मंदिर में जूना अखाड़े की लखनऊ की श्री महंत पूजा पुरी ने पूरे विधि विधान से अपने गुरू भाइयों की कलाइयों पर राखी बांधी।

वेद पुराणों में रक्षा सूत्र का वर्णन
जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री देवेंद्र पुरी महाराज ने बतायाकि भविष्य पुराण में लिखा है, उसके अनुसार सबसे पहले इन्द्र की पत्नी ने देवराज इन्द्र को देवासुर संग्राम में असुरों पर विजय पाने के लिए मंत्र से सिद्ध करके रक्षा सूत्र बंधा था। इससे सूत्र की शक्ति से देवराज युद्ध में विजयी हुए। शिशुपाल के वध के समय भगवान कृष्ण की उंगली कट गई थी तब द्रौपदी ने अपनी साड़ी का आंचल फाड़कर कृष्ण की उंगली पर बांध दिया। इस दिन सावन पूर्णिमा की तिथि थी। भगवान श्रीकृष्ण ने द्रौपदी को वचन दिया कि समय आने पर वह आंचल के एक-एक सूत का कर्ज उतारेंगे। द्रौपदी के चिरहरण के समय श्रीकृष्ण ने इसी वचन को निभाया।

राखी से होती है भाइयों की रक्षा
अखाड़े के थानापति मनोहर पुरी के कथनानुसार आज के दिन बहनों के हाथ से राखी बंधवाने से भूत-प्रेत एवं अन्य बाधाओं से भाई की रक्षा होती है। जिन लोगों की बहनें नहीं हैं वह आज के दिन किसी को मुंहबोली बहन बनाकर राखी बंधवाएं तो शुभ फल मिलता है। इन दिनों चांदी एवं सोनी की राखी का प्रचलन भी काफी बढ़ गया है। चांदी एवं सोना शुद्ध धातु माना जाता है। अतः इनकी राखी बांधी जा सकती है।

आभार दर्शाने के लिए बांधे रक्षा सूत्र
बजरंगदल के पूर्व सह-संयोजक महंत रवि पुरी ने बताया कि वैसे इस पर्व का संबंध रक्षा से है। जो भी आपकी रक्षा करने वाला है उसके प्रति आभार दर्शाने के लिए आप उसे रक्षासूत्र बांध सकते हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने रक्षा सूत्र के विषय में युधिष्ठिर से कहा था। कि रक्षाबंधन का त्योहार अपनी सेना के साथ मनाओ। इससे पाण्डवों एवं उनकी सेना की रक्षा होगी। श्रीकृष्ण ने यह भी कहा था कि रक्षा सूत्र में अद्भुत शक्ति होती है। रक्षाबंधन से सम्बन्धित इस प्रकार की अनेकों कथाएं हैं।

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