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न बिल्डिंग, न फैक्ल्टी, न लैब बन गया मेडिकल कालेज : डॉ. उमा शंकर पाण्डेय

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                       BL NEWS
                   लखनऊ। उत्तर प्रदेश में चुनाव नजदीक आते ही भारतीय जनता पार्टी साढ़े चार साल की असफलताओं से बौखलाकर कागज पर मेडिकल कालेज दौड़ानें का हास्यास्पद कृत्य कर रही है। धरातल पर लोकार्पित किये गये कई मेडिकल कालेजों में न बिल्डिंग बन पायी है न मानकों के अनुसार फैकल्टी की न नियुक्तियां हुईं हैं, न ही लैब स्थापित हुएं हैं। कागजों पर ही मेडिकल कालेज तैयार कर लोकार्पित भी कर दिया गया। फतेहपुर मेडिकल कालेज की वायरल तस्वीर में बिल्डिंग अभी भी निर्माणाधीन है। जौनपुर मेडिकल कालेज को नेशनल मेडिकल कमीशन ने मान्यता ही नहीं प्रदान की है। चुनाव के दृष्टिगत राजनैतिक फायदे के लिए आनन-फानन में यह घोषणाएं और बड़े-बड़े वादे कर दिये गये। दो माह पूर्व में भी इन मेडिकल कालेजों के लोकार्पण का प्रयास किया गया था और बगैर आधिकारिक मान्यता के ही प्रधानमंत्री द्वारा लोकार्पण की तिथि तय कर दी गयी थी। बाद में नेशनल मेडिकल कमीशन द्वारा तीन घण्टे में वर्चुअल इंसपेक्शन के माध्यम से समीक्षा कर मेडिकल कालेजों को मान्यता दे दी गयी जो यह दर्शाता है कि यह सरकार राजनैतिक फायदे के लिए तयशुदा मानकों को दरकिनार कर प्रदेश की जनता के स्वास्थ्य एवं उनके जीवन के साथ खिलवाड़ करने से भी पीछे नहीं हटती। जमीनी हकीकत यह है कि सभी मेडिकल कालेजों में पैरामेडिकल स्टाफ के साथ ही 51 फैकल्टी की नियुक्ति करनी थी जो किसी भी मेडिकल कालेज में नहीं हो पाया है। लैब के साथ ही तमाम मेडिकल कालेजों में तयशुदा मानकों को दरकिनार कर मान्यता ले ली गयी है।
उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता डॉ. उमा शंकर पाण्डेय ने कहा कि योगी सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में टिप्पणी करते हुए माननीय उच्च न्यायालय ने कहा था कि उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं भगवान भरोसे हैं। आज भी परिस्थितियां परिर्वतित नहीं हुई हैं। स्थिति इतनी विकट है कि प्रदेश के मेडिकल कालेजों में 20 प्रतिशत तथा जनपदीय अस्पतालों में 40 प्रतिशत चिकित्सकों की ब्यापक कमी है। प्रदेश में विशेषज्ञों सहित छह हजार से ज्यादा चिकित्सकों के पद रिक्त हैं। कार्यरत चिकित्सकों के वेतन सरकार समय से नहीं दे पा रही है। राजधानी के ख्यातिलब्ध अस्पतालों जैसे राम मनोहर लोहिया आर्युविज्ञान संस्थान, संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट संस्थान आदि के स्वास्थ्य कर्मी वेतन विसंगतियों को लेकर आये दिन आंदोलित होने को विवश हैं। प्रदेश के जनपदों के प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर चिकित्सकों के साथ ही न दवाई है, न जरूरी चिकित्सकीय उपकरण, न समुचित इलाज।
आज स्थिति यह है कि सरकार को पता ही नहीं है कि उत्तर प्रदेश में वास्तव में कुल कितने मेडिकल कालेज है, और उनमें से कितने संचालित हैं। यह विरोधाभास सरकार के बयानों से ही स्पष्ट होता है। यह इतना बड़ा घपला है कि मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री द्वारा बनारस में किये गये दावों पर एक बड़ा प्रश्न चिन्ह खड़ा करता है, उन्हीं की सरकार द्वारा दिये आकड़े यह विरोधाभास उत्पन्न करते है।
नीति आयोग की 2019 की रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं पूरे देश में सबसे निचले पायदान पर हैं। प्रदेश में प्रति व्यक्ति स्वास्थ्य सेवाओं पर सबसे कम खर्च के कारण प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की सेहत खराब है।
कांग्रेस पार्टी ने उत्तर प्रदेश में अपने कार्यकाल में 9 मेडिकल कालेज, तीन सुपर स्पेशियलिटी संस्थान बनायें।
भारतीय जनता पार्टी ने 2017 के अपने लोककल्याण संकल्प पत्र में 25 नये मेडिकल कालेज एवं सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल एवं छह एम्स स्तर का संस्थान स्थापित करने का वादा किया था। कांग्रेस पार्टी योगी आदित्यनाथ सरकार से अपील करती है कि प्रदेश में कुल कितने मेडिकल कालेज है इसकी नाम एवं स्थान सहित सूची उपलब्ध करायें तथा प्रदेश में कितने सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल बनाये गये इसका भी विवरण उपलब्ध कराएं। प्रदेश की जनता को भ्रमित कर उनके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ न करें, यदि योगी सरकार ने प्रदेश से झूठ बोला है तो माफी मांगें।

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