खबरों का है यही बाजार

लखीमपुर कांड- भाकपा ने जांच रिपोर्ट जारी की

0 80
 

BL NEWS

                लखनऊ। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के एक बहुसंख्य प्रतिनिधमंडल ने जनपद- लखीमपुर एवं बहराइच के उन गांवों/ क्षेत्रों का सघन दौरा किया। जहां कि केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री के किसान विरोधी इरादों को अंजाम देने के लिये उनके बेटे और उसके गिरोह ने दर्जनों लोगों को अपने वाहनों से कुचल डाला जिनमें से 4 किसान और एक युवा पत्रकार की शहादत हो गयी।
भाकपा की केन्द्रीय कार्यकारिणी के वरिष्ठ सदस्य एवं उत्तर प्रदेश राज्य काउंसिल के सचिव डा. गिरीश के नेतृत्व में वहां  भाकपा प्रतिनिधिमंडल ने वहां घटनास्थल का निरीक्षण किया और दुखित परिवारों को ढाढस बंधाया। पीड़ित परिवारों और मौके पर मौजूद रहे लोगों से घटना के संबंध में विस्तृत बातचीत भी की।
इस बातचीत के आधार पर भाकपा का निष्कर्ष है कि कुछ दिन पहले केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री द्वारा किसान आंदोलन को कुचलने की धमकी को अमली जामा पहनाने को ही मंत्री पुत्र ने इतना बड़ा और भयावह कांड कर डाला। यद्यपि रूट डायवर्ट किया गया था फिर भी मंत्री पुत्र अपने हथियार बन्द गिरोह के साथ कई वाहनों का काफिला लेकर वहां पहुंचे। जहां किसान शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर चुके थे।
उन्होंने थार गाड़ी के आगे 6 फुट लम्बी बल्ली बांधी हुयी थी, ताकि अधिक से अधिक लोग जमीन पर बिछा दिये जायें और थार के पीछे चल रहे वाहनों द्वारा उन्हें कुचल दिया जाये। केन्द्र और प्रदेश की सरकार के दबाव में पुलिस ने तमाम सबूत मिटाने की कोशिश की और मृतकों और घायलों के परिवारों को सूचना तक नहीं दी। पुलिस प्रशासन द्वारा खड़ी की गयीं करफ्यूनुमा बंदिशें भी घटना की भयावहता पर पर्दा डालने की कोशिश थी, जिसे जन दबाव ने ध्वस्त कर दिया।
यद्यपि मंत्री पुत्र की नाटकीय गिरफ्तारी हो चुकी है लेकिन लोगों का विश्वास है कि राज्यमंत्री के पद पर बने रहते उन्हें न्याय नहीं मिल सकता।
कई किसान परिवारों ने कहा कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे सरकार द्वारा दी गई राशि लौटा देंगे।
भाकपा मांग करती है कि जांच के चलने तक गृह राज्यमंत्री को हटाया जाए और उन पर हत्याओं की साजिश और उकसाबे के जुर्म में कार्यवाही की जाये। सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में सिटिंग जज द्वारा जांच करायी जाये। दोषी पुलिस प्रशासन के अधिकारियों को दंडित किया जाये। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को इन हत्याओं की नैतिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए। शहीदों के परिवारों को राहत राशि बढ़ा कर 1 करोड़ की जाये।
भाकपा की दृढ़ राय है कि यदि उत्तर प्रदेश विधान सभा का चुनाव निकट न होता और विपक्ष, किसानों का जन दबाव न होता तो भाजपा कोई कार्यवाही न करती।
भाकपा राज्य सचिव ने कहा कि  पार्टी द्वारा 4 अक्टूबर से 11 अक्टूबर तक घटना के विरोध में  देश भर में प्रदर्शन करने का आह्वान किया था, वह लगातार जारी है और उसका समापन कल 11 अक्टूबर को होगा। लेकिन शहीदों को न्याय मिलने तक भाकपा आवाज उठाती रहेगी।
भाकपा प्रतिनिधिमंडल ने इन दो दिनों में  शहीद किसान लवप्रीति सिंह, नछत्तर सिंह, दलजीत सिंह, गुरविंदर सिंह एवं पत्रकार रमन कश्यप के परिजनों से भेंट कर उन्हें ढाढस बंधाया।
प्रतिनिधिमंडल में डॉ. गिरीश के साथ राज्य कार्यकारिणी सदस्य  राजेश तिवारी, नौजवान सभा के प्रदेश अध्यक्ष विनय पाठक, भाकपा राज्य काउंसिल सदस्य रघुराज, मोहम्मद सलीम, रामशंकर नेता, सुरेश नेता, मनीष कोरी, हरप्रसाद भोजवाल, मुनब्बर अली, सुबेन्द्र सिंह  गंगा सिंह  सिध्दनाथ श्रीवास्तव आदि दो दर्जन से अधिक नेता थे।

Leave A Reply

Your email address will not be published.

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More