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अल्ट्रा मॉडर्न मेडिकल टेक्नोलॉजी से जीवनदान दे रहा है अपोलोमेडिक्स हॉस्पिटल

स्वस्थ व्यक्ति और नजदीकी रिश्तेदार का लिवर मिलने से रिकवरी जल्दी होती है

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                     BL NEWS
              लखनऊ. अपनी स्थापना के बाद से अपोलोमेडिक्स सुपर स्पेशालिटी हॉस्पिटल लखनऊ निरंतर गई और अल्ट्रा मॉडर्न मेडिकल टेक्नोलॉजी से मरीजों को नया जीवनदान दे रहा है ।
इसी कड़ी में अपोलोगेडिक्स अब एनसीआर के बाद लिविंग डोनर लिवर ट्रासप्लाट करने वाला यूपी का पहला अस्पताल है । लिवर ट्रासप्लाट के लिए लाइसेस हासिल करने के बाद यहां दूसरी लिविम डोनर ट्रांसप्लाट सर्जरी हुई । हाल ही में 45 वर्षीय लिवर के मरीज की जान लिविंग डोनर ट्राराप्लांट के जरिये बचाई गई . इस व्यक्ति को लिवर डोनेट करने वाला उनका पुत्र है ।

अपोलोगेडिक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के सीईओ व एमडी डॉ मयंक सोगानी लगातार दूसरी सफल लिविंग डोनर लिवर ट्रासप्लांट की सफलता से काफी उत्साहित है और कहते हैं , हमे इस बात की खुशी है कि हमारी टीम लखनऊ आसपास और पड़ोसी राज्यों के लोगों को एक छत के नीच ही अन्ट्रा नोडर्न मेडिकल टेक्नोलोजी से लैस स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करा रही है ।

अपोलोमडिक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल कोविड प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन करते हुए मरीजों को स्वास्थ्य लाभ पहुंचा रहा है । हमने कई असमच से लगने वाले कोसेज में भी मरीज की जान बचाई है । लगातार दूसरी बार लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लाट करने के लिए मैं डॉ आशीष कुमार मिश्रा , डी सुहाग वर्मा , डॉ वली उल्लाह , डॉ . राजीव रंजन , और उनकी टीम को बधाई और शुभकामनाए देता हूं और उम्मीद करता हूँ कि हमारी टीग इसी तरह लोगों की उम्मीदों पर हमेशा खरी उतरती रहेगी ।

डॉ आशीष कुमार मिश्र , कंसलटेंट लीवर ट्रांसप्लांट एंड एचपीबी सर्जरीज , अपोलोमेडिक्या सुपर स्पेशालिटी हॉस्पिटल ने बताया कि शराब के सेवन की अधिकता , डायबिटीज और मोटापे की बढ़ती प्रवृति से न केवल लिवर के मरीजों की संख्या बढ़ रही है बल्कि स्वस्थ लिकिंग डोनर भी मिलने में मुस्किल आती है । एक अनुमान के मुताबिक प्रतिवर्ष 40 से 50 हजार लिबर के मरीजों को लिवर ट्रांसप्लांट की आवश्यकता होती है । लेकिन स्वस्थ लिविंग डोनर या कडेवर से स्वस्थ लिवर न मिल पाने के चलते जरूरत के हिसाब से मुश्किल से 10 फीसदी मरीजों का ही द्रासालार संगत हो पाता है । कई बार लिविंग डोगर को भी कुछ समय तक मेडिकल सुपरविजन में रखना पड़ता . है ताकि ट्राप्लान्ट के लिए उसका लिवर पूरी तरह स्वस्थ हो जाए । यह आकड़े अस्पतालों में रजिस्टर होने वाले मरीजों के आधार पर है , जबकि सुदूर ग्रागीण इलाकों या चिकित्सा सेवा से वंचित क्षेत्रों में कई मामले संज्ञान में ही नहीं आते । ” लिविंग डोनर ट्रांसप्लांट सर्जरी के विषय में डॉ मिश्र ने बताया , ” अपोलोमेडिक्स हॉसिाटल में 45 वर्षीय निकट सिंह का सफल लिवर ट्रांसप्लांट किया गया । वे बेहद गंभीर हालत में अपोलोमेडिक्स लायें गए । वे लगगग बेहोशी की हालत में थे । लिवर इतना खराब हो चुका था कि उसका असर उनके दिमाग , फेफड़े और किडनी पर पड़ने लगा था । इस कड़ीशन को मेडिकल भाषा में एन्सेफ्लोपैथी कहा जाता है । वे काफी जगह इलाज करवा चुके थे लेकिन हालत में सुधार नहीं आया बल्कि स्थिति और बिगडती चली गई ।
डॉ मिश्रा ने बताया कि उनका बेटा लिवर डोनेट करने को तैयार हुआ । इसके बाद हमने ट्रांसप्लाट करने के लिए बेटे के लिवर से 80 से 86 हिरसे का लोब लिया । गरीज के ट्रांसप्लांट की सर्जरी 16 से 17 पटे चली थी . वही सोनर की सर्जरी 6 से 7 घंटे चली । ट्रांसप्लांट के बाद मरीज और डोनर दोनों को ऑब्जर्वेशन में रखा गया । लगातार दूसरा सफल लिविंग डोनर लिकर ट्रांसप्लाट करने वाला अपोलोमेडिक्रा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल इलाके का पहला प्राइवेट हॉस्पिटल बन गया है । डॉ सुहाग वर्मा ने बताया कि लिवर ट्रांसप्लाट दो विधियों से होता है , एक कैडेबर लिवर ट्रांसप्लाट , जिसमे मृत व्यक्ति का लिवर मरीज को लगाया जाता है । लिविंग डोनर ट्रांसप्लाट जीवित व्यक्ति या रिश्तेदार का लिवर का लगभग एक तिहाई हिस्सा निकालकर मरीज के शरीर में ट्रांसप्लाट किया जाता है । डोनर का लिवर महज कुछ महीनों में वापस अपने वास्तविक आकार में वृद्धि कर जाता है । डोगर के शरीर पर इसका कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता , केवल कुछ समय तक डॉक्टरों द्वारा बताई गई सावधानियां बरतनी घडली हैं । डॉ बलीउल्लाह के अनुसार लिवर सिरोसिस की वजह से ट्रांसप्लाट की सबसे ज्यादा जरूरत पड़ती है । लिवर सिरोसिस कई कारणों से होता है जिसमें मुख्यतः खानपान में लापरवाही या कोई गम्भीर बीमारी शामिल है । लिवर डोनेट कर को लेकर समाज में कई यातियां हैं जिसको कारण लिवर डोनर मिलने में कई बार दिक्कतें आती हैं । लिविग डोनर के लिए लिवर डोनेट करना बिल्कुल भी हानिकारक नहीं है , 4 से 6 हफ्ते में ही लिवर अपने वास्तविक आकार में दोबारा विकसित हो जाता है ।

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